कच्छ में गोडावण की छोटी और अलग-थलग आबादी को सहारा देने के लिए गुजरात एक्शन प्लान जारी किया गया है। 13 सितंबर को भुज में हुई समीक्षा में सामने रखी गई इस योजना को भारतीय वन्यजीव संस्थान और गुजरात वन विभाग ने तैयार किया है। गोडावण को अंग्रेजी में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कहा जाता है।

लक्ष्य 30 से अधिक पक्षियों की न्यूनतम टिकाऊ आबादी और 200 से 500 वर्ग किलोमीटर तक सुरक्षित, लगातार जुड़ा आवास तैयार करना है। शुरुआती ध्यान लगभग 200 वर्ग किलोमीटर के लाला–रावा इलाके पर रहेगा। ये आगे के लक्ष्य हैं।

घासभूमि और घोंसलों की हिफाजत

पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, नलिया में आक्रामक पौधे प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा से प्रभावित करीब 11 वर्ग किलोमीटर घासभूमि बहाल की गई है। 15 वर्ग किलोमीटर घेरे की सुरक्षा के लिए 30 किलोमीटर शिकारी-रोधी बाड़ लगाई गई है। योजना में चराई प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे से पक्षियों को होने वाले खतरों को घटाना भी शामिल है।

निष्फल अंडे की जगह जीवक्षम अंडा

‘जंप-स्टार्ट’ प्रयोग में जंगली मादा के निष्फल अंडे की जगह संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम का जीवक्षम अंडा रखा गया। मंत्रालय ने बताया कि दूसरे ऐसे प्रयास से निकला चूजा जंगल में शुरुआती तीन महीने से आगे जीवित रहा।

नलिया के पास सॉफ्ट रिलीज़ सेंटर भी बना है। यहाँ राजस्थान में संरक्षण-प्रजनन से तैयार पक्षियों को संभावित रिहाई से पहले स्थानीय वातावरण का अभ्यस्त कराया जाएगा। पक्षियों को छोड़ना उपयुक्त प्रोटोकॉल और आवास की स्थिति पर निर्भर है। चूजे का शुरुआती बचाव उत्साहजनक है, लेकिन स्थायी आबादी बनने का नतीजा लंबी निगरानी से ही मालूम होगा।

मुख्य बातें

  • योजना का लक्ष्य 30 से अधिक पक्षियों की न्यूनतम टिकाऊ आबादी है।
  • 200–500 वर्ग किलोमीटर सुरक्षित, जुड़े आवास का लक्ष्य रखा गया है।
  • नलिया में करीब 11 वर्ग किलोमीटर घासभूमि बहाली की जानकारी दी गई है।

स्रोत और संदर्भ

  1. पत्र सूचना कार्यालय / पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय · Shri Bhupender Yadav reviews progress of Great Indian Bustard Conservation, Grassland Restoration and Project Cheetah at Bhuj; Releases Gujarat Action Plan for GIB Conservation ↗13 सितंबर 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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