दिल्ली की राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा में 2–3 सितंबर के शिल्पकार समागम में 100 से ज्यादा कारीगरों के काम का जीवंत प्रदर्शन हुआ। युगे युगीन भारत संग्रहालय की योजना पर उनसे चर्चा हुई।

बुनाई, धातु-कला, लकड़ी, पत्थर, मिट्टी, बांस-बेंत और पारंपरिक चित्रकारी पर कारीगरों, डिजाइनरों तथा वास्तुकारों ने सुझाव दिए।

डिस्प्ले केस और रास्ता बताने वाले बोर्ड भी

7–8 सितंबर के वेंडर कार्यक्रम में कंपनियों ने प्रदर्शनी केस, प्रकाश व्यवस्था, संरक्षण सामग्री, डिजिटल माध्यम और दिशासूचक प्रणालियां दिखाईं। इनमें दर्शकों के रास्ते और वस्तुओं को देखने की व्यवस्था से जुड़े समाधान शामिल थे।

कारीगरों और डिजाइन टीमों के विषयवार समूह बने हैं। संग्रहालय अभी विकास की प्रक्रिया में है; कार्यक्रमों में संभावित सहयोग पर चर्चा हुई है।

मुख्य बातें

  • शिल्पकार समागम: 2–3 सितंबर, नई दिल्ली।
  • कारीगरों के साथ डिजाइनर और वास्तुकार शामिल।
  • संग्रहालय अभी विकास की प्रक्रिया में है।

स्रोत और संदर्भ

  1. संस्कृति मंत्रालय / PIB · Shilpkar Samagam and Vendor Development Programme for Yuge Yugeen Bharat Museum ↗9 सितंबर 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

यह खबर शेयर करें